Shiv Chalisa Image शिव चालीसा की छवि एक ऐसा माध्यम है, जो भगवान शिव की दिव्यता और उनके अनंत स्वरूप का परिचय कराती है। इस छवि में शिवजी की अद्भुत मुस्कान, जटाओं से निकलती गंगा, और उनके चारों ओर दिव्य आभा चित्रित की गई है।

Shiv Chalisa Image | शिव चालीसा इमेज

आजकल, डिजिटल युग में लोग शिव चालीसा के साथ-साथ Shiv Chalisa Image की भी खोज करते हैं, ताकि वे भगवान शिव की सुंदर छवि को देखकर भक्ति कर सकें। शिव चालीसा एक लोकप्रिय धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित है। इस इमेज में सम्पूर्ण शिव चालीसा लिरिक्स वर्णित होती है जिससे इसे कोई भी आसानी से पढ़ सकता है। शिव जी की ये फोटो भगवान … Read more

Shiv Chalisa In Hindi Pdf शिव चालीसा के 40 पवित्र श्लोकों को पूरी श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करता है। भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त करने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए यह पीडीएफ अत्यंत उपयोगी है।

Shiv Chalisa In Hindi Pdf | शिव चालीसा इन हिंदी पीडीएफ : दिव्य भक्ति स्तोत्र

आज के डिजिटल युग में, Shiv Chalisa In Hindi Pdf शिव भक्तो के लिए एक आसान साधन हो सकता है। शिव चालीसा एक अत्यंत लोकप्रिय भक्ति स्तोत्र है, जिसे आप अब डिजिटल फॉर्मेट में भी पढ़ सकते है। इसमें भगवान शिव के अद्भुत स्वरूप, उनकी शक्तियों और उनकी अनुकंपा का वर्णन 40 छंदों के माध्यम से किया गया है। इस पीडीऍफ़ में सम्पूर्ण चालीसा का लिरिक्स उपलब्ध है जिसे आप … Read more

Om Jai Shiv Omkara Lyrics In Hindi ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥1॥ एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे ॥ हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥2॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ॥ त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥3॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ॥ त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥4॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ॥ सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥5॥ कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी ॥ सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥6॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ॥ मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥7॥ लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ॥ पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥8॥ पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ॥ भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥9॥ जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ॥ शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥10॥ काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी॥ नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥11॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ॥ कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥12॥

Om Jai Shiv Omkara Lyrics In Hindi | ओम जय शिव ओंकारा लिरिक्स इन हिंदी

ओम जय शिव ओंकारा लिरिक्स इन हिंदी के अंतर्गत भगवान शिव की एक लोकप्रिय प्रसिद्ध आरती है, जिसमे भगवान शिव की महिमा और शक्ति का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। जो भक्तों को अत्यंत प्रिय होते हैं। Om Jai Shiv Omkara Lyrics In Hindi को विभिन्न धार्मिक स्थानों और मंदिरो में सुना जा सकता है।  शिव जी की आरती लिरिक्स को भक्ति और श्रद्धा के साथ गाने से भगवान … Read more

Om Jai Shiv Omkara Aarti ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे । हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी । सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा । पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा । भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला । शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे । ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ॥

Om Jai Shiv Omkara Aarti | ओम जय शिव ओमकारा आरती : सकारात्मक ऊर्जा का संचार

Om jai shiv omkara aarti हमारे हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र भक्ति गीत है जो भगवान शिव की महिमा और उनकी शक्ति का गुणगान करता है। इस ओम जय शिव ओमकारा आरती में भगवान शिव की अनंत शक्तियों, उनके भव्य रूप, उनके त्रिशूल, तीसरी आंख और उनके तांडव नृत्य का वर्णन किया गया है। शिव जी की आरती लिरिक्स की शुरुआत ओम जय शिव ओमकारा बोल से होती है, … Read more

Shiv Bhajan भगवान शिव की आराधना में समर्पित होता है, जो न केवल भक्ति को प्रगाढ़ करता है, बल्कि भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव भी कराता है।

Shiv Bhajan | शिव भजन

शिव भजन भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने वाला एक पवित्र गीत है। Shiv Bhajan के माध्यम से भक्त भगवान शिव की आराधना करते हैं और उनकी कृपा को प्राप्त करते हैं। इन भजनो में शिव के विभिन रूपों और उनकी लीलाओं का वर्णन किया गया है। भजन का गान करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ये भजन भगवान शिव के भक्तों द्वारा बहुत ही … Read more

om jai shiv omkara pdf भगवान शिव के विभिन्न नामों और रूपों का वर्णन करते हुए उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति को प्रगाढ़ करने का एक उत्तम माध्यम है।

Om Jai Shiv Omkara PDF | ओम जय शिव ओंकारा पीडीएफ : सम्पूर्ण लिरिक्स

ओम जय शिव ओंकारा एक प्रसिद्ध शिव आरती है, जिसे आप PDF फॉर्मेट के जरिए भी आसानी से पढ़ सकतें हैं। शिव भक्तों के लिए ओम जय शिव ओंकारा पीडीएफ एक उपयोगी संसाधन है, जो आपकी भक्ति को और अधिक सशक्त बनाता है। Om jai shiv omkara pdf में आपको ॐ जय शिव ओमकारा आरती के सम्पूर्ण लिरिक्स आपको मिल जायेंगे जिसे आप अपने पूजा में उपयोग कर सकते है। … Read more

Shiv Chalisa Aarti जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ॥ ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥१॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे ॥ हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥२॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ॥ त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥३॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ॥ त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥४॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ॥५॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ॥६॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ॥ प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥७॥ लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ॥ पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥८॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे॥ कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ॥९॥

Shiv Chalisa Aarti | शिव चालीसा आरती : जीवन में बदलाव

Shiv chalisa aarti भगवान शिव की महिमा और शक्ति का आदर व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। यह आरती, शिव चालीसा के पाठ के बाद की जाती है। इस आरती का उद्देश्य भगवान शिव को अपनी भक्ति और श्रद्धा अर्पित करना है, और इसके माध्यम से उनकी कृपा प्राप्त करना है। इस Shankar chalisa में शिवजी के विभिन्न रूपों, उनकी शक्ति और उनके दिव्य गुणों का वर्णन होता है। … Read more

Shiv chalisa || दोहा || जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान॥ कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ || चौपाई || जय गिरिजा पति दीन दयाला ॥ सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥1॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके ॥ कानन कुण्डल नागफनी के ॥2॥ अंग गौर शिर गंग बहाये ॥ मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥3॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ॥ छवि को देखि नाग मन मोहे ॥4॥ मैना मातु की हवे दुलारी ॥ बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥5॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ॥ सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥6॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ ॥ या छवि को कहि जात न काऊ ॥7॥ देवन जबहीं जाय पुकारा॥ तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥8॥ किया उपद्रव तारक भारी ॥ देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥9॥ तुरत षडानन आप पठायउ ॥ लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥10॥ आप जलंधर असुर संहारा ॥ सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥11॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ॥ सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥12॥ किया तपहिं भागीरथ भारी ॥ पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥13॥ दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ॥ सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥14॥ वेद नाम महिमा तव गाई॥ अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥15॥ प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ॥ जरत सुरासुर भए विहाला ॥16॥ कीन्ही दया तहं करी सहाई ॥ नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥17॥ पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ॥ जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥18॥ सहस कमल में हो रहे धारी ॥ कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥19॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई ॥ कमल नयन पूजन चहं सोई ॥20॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ॥ भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥21॥ जय जय जय अनन्त अविनाशी ॥ करत कृपा सब के घटवासी ॥22॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ॥ भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥23॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ॥ येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥24॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ॥ संकट से मोहि आन उबारो ॥25॥ मात-पिता भ्राता सब होई ॥ संकट में पूछत नहिं कोई ॥26॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी ॥ आय हरहु मम संकट भारी ॥27॥ धन निर्धन को देत सदा हीं ॥ जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥28॥ अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ॥ क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥29॥ शंकर हो संकट के नाशन ॥ मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥30॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ॥ शारद नारद शीश नवावैं ॥31॥ नमो नमो जय नमः शिवाय ॥ सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥32॥ जो यह पाठ करे मन लाई ॥ ता पर होत है शम्भु सहाई ॥33॥ ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ॥ पाठ करे सो पावन हारी ॥34॥ पुत्र हीन कर इच्छा जोई ॥ निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥35॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे॥ ध्यान पूर्वक होम करावे ॥36॥ त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ॥ ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥37॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ॥ शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥38॥ जन्म जन्म के पाप नसावे ॥ अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥39॥ कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ॥ जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥40॥ ||दोहा|| नित्त नेम कर प्रातः ही,पाठ करौं चालीसा ॥ तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश ॥१॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान ॥ अस्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण ॥२॥ || श्री शिव चालीसा सम्पूर्ण ||

Shiv Chalisa | शिव चालीसा : शिव की महिमा का वर्णन

शिव चालीसा भगवान शिव की स्तुति में रचित एक लोकप्रिय भक्ति पाठ है, जिसमें उनके रूप, शक्ति, और महिमा का गुणगान किया गया है। यह 40 छंदों का संग्रह है, जिसे पढ़ने से भक्तों को शिव की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन Shiv chalisa का पाठ अत्यधिक फलदायी माना जाता है। यदि आप अपने जीवन में सकारात्मकता, सुख, और शांति चाहते हैं, तो … Read more

Shiv Aarti Image में भगवान शिव की उपासना के समय उनकी शक्ति, कृपा और आशीर्वाद का अनुभव किया जाता है। शिव आरती इमेज में भगवान शिव की शक्ति और भव्यता का अद्वितीय चित्रण होता है, जिसमें वे नीलकंठ, त्रिशूलधारी और सांवले रूप में दिखाई देते हैं।

Shiv Aarti Image | शिव आरती Image : एक दिव्य अनुभव

शिव आरती Image, भगवान शिव की पूजा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। Shiv aarti image न केवल भक्तों के लिए एक आदर्श आराधना का प्रतीक है, बल्कि एक पवित्र अनुभव भी प्रदान करता है। शिव आरती की छवि में, भगवान शिव की भव्य और दिव्य मुद्रा दर्शाई जाती है, जिसमें उनके तीसरे नेत्र की चमक और त्रिशूल की शक्ति को महसूस किया जा सकता है और साथ उसमे शिव … Read more